विशेष लेख : *महिला आरक्षण की ओट में परिसीमन: लोकतंत्र की पुनर्रचना या सत्ता का पुनर्संतुलन?*
विशेष लेख : *महिला आरक्षण की ओट में परिसीमन: लोकतंत्र की पुनर्रचना या सत्ता का पुनर्संतुलन?*
लेखक: डॉ राजाराम त्रिपाठी सामाजिक चिंतक तथा अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक,
मुख्य बिंदु (बॉक्स हेतु) :-
*महिला आरक्षण के कंधे पर चढ़ाकर परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।*
*परिसीमन से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।*
*बिना पर्याप्त चर्चा के संवैधानिक बदलाव लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।*
*यह मुद्दा सत्ता बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों का है।*
भारत में 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का संतुलन दशकों से स्थिर रखा गया था, जिसे 2026 तक फ्रीज किया गया। प्रस्तावित...