जन्म एवं मृत्यु का होगा शतप्रतिशत आनलाइन पंजीयन, प्रमाण पत्र निशुल्क वितरित होंगे, जन्म -मृत्यु की रिपोर्टिंग नहीं होने पर रजिस्ट्रारों पर अर्थदण्ड लगाया जायेगा, कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न

ACN18.COM/ कोरबा. कलेक्टर किरण कौशल ने कोरबा जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी रजिस्ट्रारों की बैठक लेकर केन्द्रीय साॅफ्टवेयर का उपयोग करते हुये जन्म एवं मृत्यु का शत प्रतिशत आनलाइन पंजीयन करने के निर्देश अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक दिए हैं। ऑनलाइन पंजीयन के बाद बने प्रमाण पत्रों वितरण का निशुल्क किया जाएगा। जन्म एवं मृत्यु की रिपोर्टिंग नहीं करने वाले रजिस्ट्रार अधिकारियों के विरूद्ध अर्थदण्ड लगाने की कार्रवाई भी होगी। श्रीमती कौशल ने आज कलेक्टोरेट सभा कक्ष जन्म एवं मृत्यु पंजीयन से जुड़े अधिकारियों और रजिस्ट्रारों की अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक ली और जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने सभी जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, पंचायत सचिवों, शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों के प्रभारी अधिकारियों, नगरीय निकायों के स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में होने वाली जन्म एवं मृत्यु की रिपोर्टिंग आॅनलाइन साॅफ्टवेयर में अनिवार्यतः करने के निर्देश भी दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुंदन कुमार, सिविल सर्जन डाॅ. अरूण तिवारी, सीएमएचओ डाॅ. बी.बी. बोडे, जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी श्री एम. एस. कंवर, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आनंद किस्पोट्टा सहित सभी अनुभागों के एसडीएम और जन्म-मृत्यु पंजीयन करने वाले रजिस्ट्रार भी शामिल हुए।
कलेक्टर ने बैठक में रजिस्ट्रारों को उनके क्षेत्र में होने वाले सभी जन्म-मृत्युुओं का पंजीकरण करने, प्रमाण पत्र वितरण करने और इसका मासिक प्रतिवेदन हर माह की 5 तारीख तक प्रेषित करने के सख्त निर्देंश दिए। उन्होंने पंजीयन नहीं किए जाने अथवा रिपोर्टिंग नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित रजिस्ट्रारों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने, अर्थदण्ड वसूलने के निर्देंश दिए।
कोरबा जिले में जन्म एवं मृत्यु का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। जन्म – मृत्यु अधिनियम 1969 के अनुसार देश के प्रत्येक की घटनाओं का पंजीयन किया जाना अनिवार्य है। बैठक में जन्म-मृत्यु पंजीयन वर्ष 2020 की प्रगति की समीक्षा की गई। कोरबा जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जन्म-मृत्यु की रिपोर्टिंग नहीं करने को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने पंजीयन की रिपोर्टिंग पर नाराजगी व्यक्त की और जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी को जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए माॅनिटरिंग सिस्टम विकसित करने को कहा। कलेक्टर ने सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में होने वाले मृत्यु के प्रकरणों में मृत्यु का चिकित्सीय प्रमाणीकरण प्रपत्र भी अनिवार्य रूप से देने को कहा।
जन्म प्रमाण पत्र बच्चे का प्रथम वैधानिक अधिकार और पहचान- जन्म प्रमाण पत्र बच्चे का प्रथम वैधानिक अधिकार और पहचान है। जन्म तिथि, जन्म स्थान का प्रामाणिक दस्तावेज पैतृक सम्पत्ति,उत्तराधिकार के निराकरण हेतु भी यह पंजीयन एवं जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी है। कोर्ट, कचहरी के मामले में मृत्यु के साक्ष्य के रूप में भी यह सहायक है। इसी तरह स्कूल में दाखिला, ड्राइविंग लाइसेंस, मताधिकार, पासपोर्ट, बीमा संबंधी मामलों में मुआवजा प्राप्ति, दावा करने में सहायक है। राशन कार्ड में नाम जुड़वाने ईत्यादि में भी इसका उपयोग होता है। समाज कल्याण योजनाए बनाने के लिए और उनका लाभ उठाने के साथ-साथ जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े हेतु उपयोगी है।
पंजीयन से बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनना होगा आसान- राज्य शासन द्वारा दिए गये निर्देंशों के अनुसार बच्चों के जन्म के साथ ही उनका जाति प्रमाण पत्र बनाया जाना है। इसके लिए शिशु के जन्म के एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से जन्म पंजीकरण करने और प्रमाण पत्र वितरण करने के निर्देंश दिए गये।
बीमा योजना के भुगतान के लिए भी मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के भुगतान के लिए भी मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। इसके लिए भी एक सप्ताह के भीतर पंजीकरण कर मृत्यु प्रमाण पत्र वितरण करने के निर्देंश दिए गये।
जन्म मृत्यु पंजीयन कराने की इकाई- ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म-मृत्यु पंजीयन कराने की इकाई सभी ग्राम पंचायतें है। शहरी क्षेत्रों में सभी नगरीय निकायों नगर निगम नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अलावा संस्थाएं जैसे सभी शासकीय एवं सार्वजनिक उपक्रमों के अस्पताल में जन्म – मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जाता है।